नई दिल्ली। मेघालय की राजनीति में बुधवार को एक बड़ा और महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया, जब यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (यूडीपी) के आठ विधायकों ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम लिया। नई दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा की गरिमामयी उपस्थिति में इन सभी विधायकों ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण की। इस बड़े उलटफेर के बाद 60 सदस्यीय मेघालय विधानसभा में भाजपा के विधायकों की संख्या बढ़कर 10 हो गई है, जिससे राज्य में पार्टी का राजनीतिक कद और प्रभाव काफी बढ़ गया है।

भाजपा में शामिल होने वाले आठ विधायकों के नाम

यूडीपी छोड़ भाजपा में शामिल होने वाले प्रमुख विधायकों में लखमेन रिम्बुई, पायस मारवेन, किर्मेन श्यल्ला, मायरालबॉर्न सिएम, मैथ्यू कुर्बाह, ओलन सिंह सुइन, बालाजीड कुपार सिनरेम और सिनशर लिंगडोह थबाह शामिल हैं। इन सभी नेताओं ने राष्ट्रीय राजधानी में औपचारिक रूप से पार्टी की सदस्यता ली। इनके आगमन से पूर्व विधानसभा में भाजपा के केवल दो सदस्य थे, जो अब बढ़कर 10 हो गए हैं।

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू का वक्तव्य

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सभी नए सदस्यों का पार्टी में आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में विगत 12 वर्षों के दौरान पूर्वोत्तर क्षेत्र तथा मेघालय में अभूतपूर्व विकास और सकारात्मक बदलाव आया है। पूर्वोत्तर के प्रति प्रधानमंत्री की विशेष निष्ठा और केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों से प्रभावित होकर ही इन जनप्रतिनिधियों ने भाजपा के साथ मिलकर काम करने का निर्णय लिया है।

विधानसभा में बदला सीटों का गणित

आठ विधायकों के एक साथ पाला बदलने से मेघालय विधानसभा के भीतर नया राजनीतिक समीकरण बन गया है। क्षेत्रीय दल यूडीपी के लिए यह एक बड़ा झटका माना जा रहा है, वहीं भाजपा का संख्या बल 2 से सीधे 10 पहुंच गया है। इस बदलाव से सदन के भीतर भाजपा की उपस्थिति और नीतिगत निर्णयों में उसकी भूमिका पहले से कहीं अधिक प्रभावकारी और मजबूत होगी।

पार्टी में शामिल होने से पहले रखी गईं प्रमुख मांगें

जानकारी के अनुसार, इन विधायकों के शामिल होने की पृष्ठभूमि पिछले कुछ समय से तैयार हो रही थी। भाजपा शीर्ष नेतृत्व के समक्ष विधायकों ने राज्य से जुड़े कई मूलभूत और संवेदनशील विषय रखे थे। इनमें खासी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करना, कोयला खनन से जुड़े नियमों का सरलीकरण, 'मेघालय रेजिडेंट्स सेफ्टी एंड सिक्योरिटी एक्ट' को प्रभावी ढंग से लागू करना तथा शिलांग की हरिजन कॉलोनी को थेम इयू मावलोंग से अन्यत्र स्थानांतरित करने जैसे मुख्य मुद्दे शामिल थे। इन मांगों पर सकारात्मक संवाद के उपरांत ही विधायकों ने यह निर्णय लिया।

मेघालय के राजनीतिक परिदृश्य पर प्रभाव

यूडीपी विधायकों के इस कदम से मेघालय की राजनीति में क्षेत्रीय दलों के वर्चस्व और सत्ता संतुलन पर गहरा असर पड़ेगा। भाजपा के पास अब 10 विधायकों का ठोस आधार है, जो राज्य में पार्टी के जनाधार और पूर्वोत्तर विस्तार नीति की एक बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है। आगामी दिनों में राज्य सरकार के कामकाज और भावी राजनीतिक गठबंधनों पर इसका क्या असर पड़ता है, यह देखना दिलचस्प होगा।