दतिया। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में दतिया से कांग्रेस विधायक घनश्याम सिंह की विधायकी को रद्द करने के लिए एक याचिका दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि उन्होंने अपने चुनावी नामांकन पत्र में पुराने आपराधिक मामले (क्रिमिनल केस) की जानकारी छिपाई है। सदस्यता रद्द करने की मांग के साथ ही दतिया सीट पर दोबारा उपचुनाव कराने की भी मांग की गई है।
क्या है पूरा मामला और क्या है आरोप
यह याचिका बीजेपी नेता और वकील दीपक बेलपत्री द्वारा मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में दायर की गई है। याचिका में मुख्य आरोप है कि घनश्याम सिंह ने दतिया उपचुनाव के दौरान नामांकन दाखिल करते वक्त गलत जानकारियां दीं और साल 1991 के एक पुराने क्रिमिनल केस का ब्योरा छिपाया।
यह पूरा मामला पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के बाद दतिया में किए गए एक चक्का जाम प्रदर्शन से जुड़ा हुआ है। उस दौरान प्रदर्शन के सिलसिले में 22 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था, जिसमें घनश्याम सिंह का नाम भी शामिल था। आरोप है कि उन्होंने अपने शपथपत्र में इस मामले को छोड़कर बाकी अन्य मामलों की जानकारी तो दी थी, लेकिन इसे छुपा लिया था।
उपचुनाव के नतीजे और राजनीतिक सफर
गौरतलब है कि पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता रद्द होने के बाद दतिया विधानसभा सीट खाली हो गई थी, जिसके बाद यहां उपचुनाव कराए गए। इस मुकाबले में बीजेपी ने आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारा, जबकि कांग्रेस ने दतिया राजघराने से ताल्लुक रखने वाले घनश्याम सिंह को टिकट दिया। कड़े मुकाबले के बाद घनश्याम सिंह ने बीजेपी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को 6016 वोटों के अंतर से हरा दिया था।
घनश्याम सिंह का राजनीतिक सफर काफी लंबा रहा है और वे चार बार विधायक रह चुके हैं। उन्होंने 1993, 2003 और 2026 में दतिया विधानसभा सीट से जीत हासिल की, जबकि 2018 में वे सेवढ़ा विधानसभा सीट से विधायक चुने गए थे। उनके पिता कृष्ण सिंह जू देव भिंड सीट से सांसद रह चुके हैं और दतिया क्षेत्र में इस राजघराने का अच्छा खासा प्रभाव माना जाता है।





